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तनाव बढ़ रहा हो तो इन बातों का रखें ख़्याल

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कामना छिब्बर

अपनी आदतों में बदलाव लाकर भी हम तनाव से काफ़ी हद तक बच सकते हैं, कैसे जानना चाहेंगे आप. 

ज़िंदगी है तो तनाव भी होगा. इसे यूं भी कह सकते हैं तनावों से घिरा ही जीवन होता है.

जीवन में तरह तरह की चुनौतियां हमारे सामने आती हैं. जब बात संबंधों और रिश्तों की हो तो इन चुनौतियों की जटिलताएं भी बढ़ जाती हैं.

इन सबका असर हमसब पर होता है, लेकिन आपको ध्यान आ रहा होगा कि इसकी हम बहुत परवाह नहीं करते. इन चुनौतियों के बीच अपनी देखभाल को लेकर हम सब लापरवाह लोग हैं.

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लेकिन जीवन की बढ़ती मुश्किलों में सबसे अहम बात यही है कि आप खुद का कितना ध्यान रखते हैं, खुद को कितना बेहतर रखते हैं.

इसलिए आइए, कुछ ऐसी बातों पर ध्यान देने की कोशिश करें जिसकी मदद से आप दिन प्रतिदिन की चुनौतियों का सामना कहीं ज़्यादा संयम, एकाग्रता और भरोसे से कर पाएंगे.

1. अपने लिए समय निकालिए, जिन चीज़ों से आपको ख़ुशी मिलती है समय निकालकर उन्हें कीजिए-  ज़्यादातर लोग एक ऐसे चक्र में फंसे होते हैं जिसमें दूसरे लोगों को ध्यान में रखना, दूसरों को खुश रखने की कोशिश और दूसरे क्या चाहते हैं, इन सबकी चिंता ज़्यादा होती है. इन सबके बीच हमें किस बात से खुशी मिलती है, वह कहीं पीछे छूट जाती है. हमें समझना होगा कि जो चीज़ हमें शांति और संतोष का एहसास कराती है, उसकी हमें ज़्यादा ज़रूरत है. इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि आप दूसरों के लिए जो कुछ कर रहे हैं या कर सकते हैं वह नहीं करना है. आपको बस यह समझना है कि अपने लिए समय निकालना बेहद अहम है.

2. जिन चीज़ों से आपका तनाव बढ़ता हो, उसकी पहचान करें और उस पर नियंत्रण पाने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की दिशा में काम करें-  कुछ चीज़ें दूसरों की तुलना में हमारे लिए ज़्यादा कष्टप्रद हो सकती हैं. ऐसी चीज़ों के बारे में जानना और उसकी पहचान करने से उससे बचाव और उसके निदान के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलती है. कई बार यह तब होता है जब आप अपनी भावनाओं से भरे हों या समर्पण के भाव में हों तब ऐसी चीज़ें आक्रामक होकर आप पर हावी हो सकती हैं और आपके अपने और जीवन के प्रति सोच को प्रभावित कर सकती है. इसलिए समस्याओं के निवारण के उपायों को विकसित करने के लिए सावधानीपूर्वक और लगातार कोशिश करते रहना आपके लिए अच्छा होगा.

3. जो चीज़ें परेशान करती हों, उससे संपर्क ना रखें- कई बार आपको ऐसी बाध्यता महसूस होती होगी कि उन सभी चीज़ों से जुड़े रहना चाहिए जिन्हें आप अपने मूल्यों, विश्वासों और नैतिकताओं के चलते अब तक मानते आए हैं. लेकिन जिससे दुख हो, जिससे आपके अंदर किसी स्थिति, दूसरे लोग या फिर जीवन के प्रति नकारात्मक सोच बढ़े या फिर जिससे आपमें अस्पष्टता-अनिश्चितता का बोध आए, उन सभी चीज़ों से संपर्क तोड़ लेना ही बेहतर होता है.

4. अपने प्रियजनों से जुड़ें और एक सपोर्ट सिस्टम बनाएं- अपने आसपास एक मज़बूत और भरोसे के लायक सपोर्ट सिस्टम के सामने कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है. इस सपोर्ट सिस्टम में आपके दोस्त, परिवार के सदस्य, सहकर्मी और सहयोगी सब शामिल हो सकते हैं. अपने आसपास सपोर्टिव नेटवर्क के लोगों की मौजूदगी से आप थोड़ा चैन महसूस करेंगे, इस बात की भी निश्चिंतता रहेगी कि अगर कोई मुश्किल आयी तो कोई ना कोई है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि आवश्यकता पड़ने पर वे आपको किसी भी मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकाल लाएंगे.

5. आप जो सोचते-महसूस करते हैं उसके बारे में बात करें- दैनिक जीवन की भाग-दौड़ में अक्सर हम अपने विचारों और भावनाओं की प्रासंगिकता को भूल जाते हैं. जिन लोगों के साथ आप सहजता से घुल मिल जाएं और जिन पर आप पर भरोसा करते हों, उनसे नियमित तौर पर अपनी सोच और भावनाओं के बारे में बात करते रहना चाहिए. यह आपके लिए स्थायी मदद की दिशा में अहम क़दम है. आपके आसपास जो लोग मौजूद हैं उनसे खुलने और उनसे ईमानदार होने को लेकर कोई हिचक नहीं रखें. इसके बदले वे जो मदद दे रहे हैं और दे सकते हैं, उनका इस्तेमाल कीजिए.

6. प्रोफेशनलों से मदद लेने में कभी नहीं हिचकें- यदि आप अपने आप को अपने ही मूड में डूबा हुआ पाते हैं, अनिश्चितता महसूस करते हैं कि आप कहां हैं या आप कहां जा रहे हैं, यदि जीवन का कोई उद्देश्य नहीं दिखता हो या आपको लगता है कि आप अपने और अपने संबंधों के बारे में अनिश्चित होते जा रहे हैं, तो प्रोफेशनलों से मदद लीजिए. ये सब हमारे मस्तिष्क की उलझनें होती हैं. ऐसे में इन उलझनों का हल तलाशना ज़रूरी है और इसके लिए किसी एक्सपर्ट की मदद लेना समस्या से बाहर निकलने की दिशा में सही क़दम होगा. आप किसी हेल्पलाइन पर फ़ोन करके मदद मांग सकते हैं या फिर किसी मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक से संपर्क कर सकते हैं.

अपना ध्यान रखने से ही आप अपने आसपास के लोगों की मदद करने में सक्षम होंगे. ध्यान रखें कि अपनी देखभाल करने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

 

(आलेख में निजी विचार हैं. हेल्थ कलेक्टिव, किसी एक्सपर्ट या प्रशिक्षित मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट का विकल्प नहीं हो सकता. मदद के लिए – भारत में मौजूद सुविधाएं यहां देख सकते हैं.

 

Feature Image from rawpixel.com

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